Monday, April 11, 2011

क्या आप भारतीय हैं?

चौंकिए मत। सवाल बहुत सीधा है पर जवाब थोड़ा मुश्किल! यहां मैं

एक ऑरकुट यूजर (http://www.orkut.co.in/Main#Profile?uid=9173858360548539962)

के द्वारा अपडेट किए गए कंटेट को हू-ब-हू प्रकाशित कर रहा हूं जो व्ययंग के रूप में हम सभी के मुंह पर एक जोरदार तमाचा है-

An American Visited India n Went Back..

Where He Met an Indian Frnd Who Asked:

"HOW WAS MY COUNTRY"?

It's a Great Country..with..Solid Ancient History & Immensely Rich with Natural Resources.!

He then Proudly asked:

"HOW DID U FIND INDIANS"?

Indians..Who Indians.?

I didn't Find or Meet a Single Indian there.

What Nonsense..Who else can u meet?

He said...

In Kashmir..Kashmiri

In Punjab..Punjabi

In Bihar..Bihari

In Maharashtra..Marathi

In Rajhastan..Marwadi

In Bengal..Bengali

also met..

Muslim

Hindu

Jain

Buddhist n many many more but my 'Indian' frnd

NOT A SINGLE INDIAN DID I MEET!

Thursday, April 7, 2011

सवाल सिर्फ अन्ना हजारे के अनशन का ही नहीं है..


अन्ना हजारे द्वारा शुरू किए गए आमरण अनशन को समर्पित

अन्ना हजारे द्वारा शुरू किए गए आमरण अनशन के बाद हर कोई अन्ना हजारे-अन्ना हजारे किए हुए है. हम सभी इसके पक्ष में दो शब्द लिखकर खुद को प्रगतिशील साबित करने में लगे हुए हैं. पर इससे पहले हमें खुद से एक इमानदार सवाल करना चाहिए कि राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन हम कितना कर रहे हैं या फिर एक खोखले बतंगरो की जमात का हिस्सा हैं जिनका रिव्योलुशन(क्रांतिकारिता) एसी कमरों से शुरू होकर, हवाई यात्रायें करते हुए बोतल बंद पानी और शीतल पेय पदार्थों के रूप में बह जाते हैं या ब्रांडेड सिगरेट के कश से निकले धुएं में उड़ जाते हैं. इस सबके बावजूद इस 'खोखले बतंगरो की जमात' को दाद तो देनी होगी! क्योंकि एसी कमरों में रहने, हवाई यात्रायें करने, बोतल बंद पानी और शीतल पेय पदार्थों का प्रयोग करने, ब्रांडेड सिगरेट का कश लेकर धुआं उड़ाने के बावजूद जब भी इनकी जबान खुलती है या इनका कलम चलता है, इनकी जबान और कलम दोनों से सिर्फ आदिवासी, गरीब, आत्महत्या करने वाले किसान और समाज का सबसे वंचित तबका ही निकलता है. चलो शुक्र है एसी कमरों में समय गुजारने से लेकर ब्रांडेड सिगरेट का कश लेकर धुआं उड़ाने तक इन्हें यह सब याद तो रहता है.

Wednesday, April 6, 2011

मगर पत्थर में अब उतनी औकात ना रही..

तुममें भी वो बात ना रही,

और हममें भी शायद

पहले सी अब वो मुलाकात ना रही।

बज्म तो धुआं है मेरा,

फिर घुल उठेगा

इस जहां में,

तुम हटा देते वो

पत्थर, जो है धरा हमारे

रिश्तों के उसूल पर

न वो हट रहा है,

शुरूआत हो रही है पिघलने की

मार पाता पत्थर भी ठोकर,

मगर पत्थर में अब

उतनीऔकातनारही।

- संदीप वर्मा दीपक