Monday, May 19, 2008

जगत जननी सीता की पावन धरतीःसीतामढी


- विवेक विश्वास

(Punaura-Birth Place of Sita mata)
भारतीय गणराज्य के बिहार प्रान्त के उत्तरी सीमा पर बसा है सीतामढी.इस जिले की उतरी सीमा,पड़ोसी देश नेपाल की सीमा से जुड़ी हुई है.
ऐसी मान्यता हैं कि जिला मुख्यालय से पाँच किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में पुनौरा नामक स्थान पर जगत जननी सीता का जन्म हुआ था। जहाँ आज श्री राम और सीता का भव्य मंदिर है,जो
श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है. मंदीर में स्थापित श्री के मूर्ति की पूजा रोज मठाधीश के द्वारा की जाती है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार सीतामढी कभी न्यायप्रिय राजा जनक के राज्य का हिस्सा हुआ करता था. उनके शासनकाल में एक समय ऐसा भी आया जब प्राणदायीनी जल के बुंद-बुंद के लिए लोग तरस रहे थे.इन्द्रदेव की नाराजगी का यह आलम था कि राजा जनक के पूरे राज्य में अन्न के लाले परे थे.तभी यह भविष्यवाणी हुई कि राज्य के पालन हार राजा जनक यदि स्वयं पूरे राज्य में हल चलाते हैं तब आसमान भी बदहाल जनता के दर्द पर रो परेगी.
अब राजा जनक के लिए एक तरफ था राजसी ठाठ-बाठ तो दुसरी तरफ उनकी भूखी-प्यासी जनता.परिस्थिती ऐसी थी कि जनकपूर-नरेश ने हल थामना ज्यादा बेहतर समझा.जब जनकजी हल जोतते हुए सीतामढी के पुनौरा पहुँचे तो हल लगने के कारण धरती में गड़ा एक घड़ा फुटा और उस घड़े से सीताजी अवतरीत हुईं.
सीताजी का जन्म होना था कि आसमान भी खुद को रोक न सका और बारिस की बुंदें झरने लगी.इन बारिस की बुंदों से जगत जननी सीता को बचाने के लिए राजा जनक जगत जननी को लेकर एक मड़ई(झोपड़ी) की तरफ भागे.यह मड़ई अब सीतामड़ई अर्थात सीता की झोपड़ी के नाम से जाना जाने लगा.किंवदती है कि यही नाम कालान्तर में अपभ्रंश होकर सीतामढी हो गया.
श्रद्धालु पुनौराधाम में स्थित मंदिर के साथ-साथ,सीतामढी नगर में स्थित जानकी मंदिर के दर्शन करना भी नहीं भुलते.
जहाँ सीतामढी नगर से लगभग 40 किलोमीटर की दुरी पर दरभंगा की तरफ जाने वाली रेलवे लाइन के समीप रामायण से जुड़ी अहिल्या स्थान है तो दुसरी तरफ लगभग 60 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में नेपाल की सीमा में राजा जनक की राजधानी जनकपुर स्थित है.

3 comments:

जितेन्द्र दवे said...

sitamadhi ke baare mein padhkar bahut khushi hui. bahut achchaa likhaa hai aapne.

Rakesh said...

This is very good place and this is my birth place also. I like sitamarhi.

Dr.Vikas said...

Sitamarhi k utthan k liye hme tatpar hona hoga taki sita maiya k jnmsthli ko viksit kiya jaye